यह कोई आरोप नहीं है और इस मामले में हम राज्य सरकार से उम्मीद करते हैं कि वह पूरे मामले की जांच कराये और समुचित न्यायसम्मत कार्रवाई करे। आखिर राज्य सरकार स्वयं भी कहती है कि वह सूबे में न्याय के साथ विकास कर रही है।
मामला सूबे के उद्योग मंत्री डा रेणु देवी कुशवाहा से जुड़ा है। अपना बिहार के संपादक को लिखे एक पत्र में एक बिहारवासी ने डा कुशवाहा पर घुस मांगने का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता ने बताया है कि वह एक रुग्न औद्योगिक इकाई के मालिक हैं और अपनी इकाई को फ़िर से स्थापित करना चाहते हैं। इस संबंध में रुग्नता प्रमाण पत्र दिये जाने के बावजूद जब सूबे के उद्योग विभाग से उन्हें कोई सहायता नहीं मिली तब शिकायतकर्ता ने इस संबंध में उद्योग मंत्री से गुहार लगाया। शिकायतकर्ता का यह भी कहना है कि माननीया मंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध हैं और इसी संबंध के आधार पर उन्होंने अनुमान लगाया था कि वह उनके साथ न्याय करेंगी। परंतु, दो दिनों के बाद उन्हें मंत्री जी के आवास से एक फ़ोन किया गया कि 10 लाख रुपये दे दिजीये, आपका काम हो जायेगा।
बहरहाल, यह खबर हम इसलिये प्रकाशित कर रहे हैं ताकि कार्रवाई हो सके। भ्रष्टाचार के खिलाफ़ कथित तौर पर जो कदम उठाये जाने के दावे किये जा रहे हैं, उसकी पुष्टि हो सके। संभव है कि जब इस मामले की जांच होगी तो अनेक मामले निकलकर सामने आयेंगे। संभव है कि यदि बिहार सरकार द्वारा इस मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की गई तो सूबे के व्यवसायियों का विश्वास सरकार पर बढेगा। जाहिर तौर पर इसका लाभ तो बिहार को ही मिलेगा।
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