Thursday, May 26, 2011

कानोंकान - शाही जी का शाही अंदाज और रक्तचरित्र


उनका नाम प्रशांत कुमार शाही है। जाति के भूमिहार हैं और सूबे के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के अत्यंत करीबी हैं। पहले जब महाधिवक्ता थे तब कैग द्वारा जगजाहिर किये गये साढे ग्यारह हजार करोड़ रुपये के एसी डीसी बिल घोटाले के मामले में विधानसभा चुनाव के ठीक पहले इन्होंने श्री कुमार के लिय बजरंग बली वाला रोल प्ले किया था और किसी तरह सीबीआई जांच के मामले को ठढे बस्ते में डालने पर हाईकोर्ट को मजबूर कर दिया था।

जाहिर तौर पर अपने सबसे लायक सिपाहसलार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का प्यार मिलना था। सो मिला। श्री कुमार ने भी उनकी योग्यता को समझा और सबसे महत्वपूर्ण शिक्षा विभाग की जिम्मेवारी सौंप दी। खैर श्री शाही ने भी अपनी जिम्मेवारी को समझा और आजकल ये पूर्ण रुप से अपने विभाग को चमकाने में लगे हैं। लोगों का कहना है कि ये पैसा नहीं पकड़ते हैं, क्योंकि पूर्व में बहुत पकड़ चुके हैं। इसलिये आजकल ये केवल अपनी छवि सुधारना चाहते हैं। अब ये जातीयता के बंधनों को भी तोड़ चुके हैं। इसका सबसे बड़ा प्रमाण यह कि सत्तारुढ दल की एक स्वजातीय महिला विधायक के अनुरोध को भी इन्होंने ठुकरा दिया। विधायक महोदया के पिता एक विश्वविद्यालय में कुलपति हुआ करते थे। उनके उपर वित्तीय अनियमितता का आरोप था। के के पाठक ने उनके खिलाफ़ जांच कराया तो जांच करने वाले अधिकारी ने महिला विधायक के पिता के बारे में लिखा - ये अपने नाम से अधिक रुपया पैसा शर्मा के नाम से जाने जाते हैं। मामला बहुत ही संगीन था और श्री पाठक इस पुरे मामले को निगरानी के हाथों में सौंपना चाहते थे। परंतु, बेचारे इससे पहले स्वयं ही नप गये।

खैर, मामला शाही जी के पास लाया गया। महिला विधायक ने सारे हथियार आजमाये, लेकिन शाही जी टस से मस न हुए। बाद में महिला विधायक ने अपने आकाओं से अनुरोध किया तो शाही जी ने दूसरे अधिकारी से जांच कराने का आश्वासन दिया। दूसरे अधिकारी ने भी जांच की। इस बार जांच प्रतिवेदन और खतरनाक थी। अब शाही जी ने भी जाति धर्म को छोड़कर राज्य धर्म को अपना लिया है और पुरे मामले को निगरानी को सैंपने का निर्णय कर लिया है।

खैर, अब शाही जी न्यायप्रिय हो चुके हैं। एक खामी है गुटखा चबाने की। हालांकि यह इनकी निजी मजबूरी है, इसलिये कुछ नहीं कहा जाना चाहिये, सो हम भी कुछ नहीं कहेंगे। लेकिन सुना है कि इनकी आजकल निभ नहीं रही है। संभवतः इन्होंने अपने आका के एक आदेश का उल्लंघन कर दिया है और फ़िर अपने विभाग के सेनानायक के साथ भी रिश्ते खराब कर लिये हैं। वैसे रिश्ते खराब होने की एक और बड़ी वजह है। लोग कहते हैं कि सब रक्तचरित्र है।

(नवल किशोर कुमार)

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